साहित्य सम्मेलन में 'डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष' का हुआ लोकार्पण ।

साहित्य सम्मेलन में 'डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष' का हुआ लोकार्पण ।
जयंती पर कवि शुभचंद्र सिन्हा तथा कवयित्री यशोदा शर्मा को दिया गया स्मृति-सम्मान, हुआ कवि-सम्मेलन ।

पटना, २६ जून । सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने बुधवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पुस्तकालय में नव-निर्मित 'डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष' का लोकार्पण किया। डा शरण की जयंती पर आयोजित इस समारोह में श्री प्रसाद ने सुख्यात कवि शुभचंद्र सिन्हा को इस वर्ष का 'डा दीनानाथ स्मृति सम्मान' से विभूषित किया। इस वर्ष का 'शैलजा माला स्मृति सम्मान' विदुषी कवयित्री यशोदा शर्मा को दिया गया। सम्मान स्वरूप अंग-वस्त्रम और प्रशस्ति-पत्र के साथ श्री सिन्हा को ग्यारह हज़ार रूपए तथा श्रीमती शर्मा को पाँच हज़ार रूपए की सम्मान-राशि भी प्रदान की गयी।
इस अवसर पर अपने उद्गार में पूर्व राज्यपाल ने कहा कि पटना सिटी के गुरु गोविंद सिंह कौलेज में प्राध्यापक रहे शरण जी अपनी महान हिन्दी सेवा के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एक तपस्वी की तरह हिन्दी की सेवा की। उनकी मूल्यवान हिन्दी सेवाओं के लिए साहित्य सम्मेलन ने अपने पुस्तकालय में एक कक्ष अर्पित कर उनको उचित ही सम्मान दिया है। 
श्री प्रसाद ने कहा कि हिन्दी साहित्य सम्मेलन 'हिन्दी' की ऊन्नति के लिए अनेक प्रशंसनीय कार्य किया है। ऐसी संस्थाओं के प्रयास से हिन्दी का संपूर्ण भारत वर्ष में तीव्रता से विकास हो रहा है। हिन्दी के लिए हम सबको आगे बढ़कर प्रयास करना चाहिए और साहित्य सम्मेलन को भी बल प्रदान करना चाहिए।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि डा शरण हिन्दी के कुछ उन थोड़े से मनीषी साहित्यकारों में थे, जो यश की कामना से दूर, जीवन पर्यन्त साहित्य और पत्रकारिता की एकांतिक सेवा करते रहे। वे मनुष्यता और जीवन-मूल्यों के कवि और विद्वान समालोचक थे। एक सजग कवि के रूप में उन्होंने पीड़ितों को स्वर दिए तथा शोषण तथा पाखंड के विरुद्ध कविता को हथियार बनाया। 
डा सुलभ ने कहा कि, शरण जी की ख्याति उनके द्वारा प्रणीत आलोचना-ग्रंथ 'हिन्दी काव्य में छायावाद' से हुई। उन्होंने नेपाल में हिन्दी के प्रचार में भी अत्यंत महनीय कार्य किए। त्रीभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू में 'हिन्दी-विभाग' की स्थापना का सारा श्रेय भी शरण जी को जाता है। वे 'नेपाली साहित्य का इतिहास' लेखन तथा नेपाली कृतियों के हिन्दी अनुवाद के लिए भी सम्मान पूर्वक स्मरण किए जाते हैं। उन्होंने साहित्य की प्रायः सभी विधाओं; कविता, कहानी, संस्मरण, उपन्यास, ललित निबन्ध, भेंट-वार्ता तथा शोध-निबन्ध में भी अधिकार पूर्वक लिखा।
दूरदर्शन, बिहार के कार्यक्रम प्रमुख डा राज कुमार नाहर, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, डा ध्रुव कुमार, विभारानी श्रीवास्तव, डा शरण के परिजन प्रमोद कुमार सिन्हा और सुषमा वर्मा आदि ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि मधुरेश नारायण, मधुरानी लाल, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, सिद्धेश्वर, सम्मान से विभूषित हुए कवि शुभ चंद्र सिन्हा, कवयित्री यशोदा शर्मा, डा शालिनि पाण्डेय, डा ओम् प्रकाश जमुआर, सुनील कुमार, अरुण कुमार श्रीवास्तव, राजप्रिया रानी, निभा चौधरी, रौली कुमारी, सुनीता रंजन, नरेंद्र कुमार, नीता सहाय, अरविंद अकेला, सुजाता मिश्रा, सरिता कुमारी, सुधा पाण्डेय, नीता सिन्हा, कमल नयन श्रीवास्तव, ऋतिक रंजन, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
सम्मेलन के भवन अभिरक्षक डा नागेश्वर प्रसाद यादव, प्रवीर पंकज, कमल नयन श्रीवास्तव, डा मनोज संढवार, नीता सहाय, चंद्र प्रकाश मधुकर, अमीर नाथ शर्मा, विनोद कुमार सिन्हा, मोहम्मद फ़हीम, अमन वर्मा, नरेंद्र कुमार, अल्पना कुमारी, नन्दन कुमार मीत आदि प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।

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