Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

बीतल जवानी अब बुढ़ापा से भेंट भ‌इल।

बीतल जवानी अब बुढ़ापा से भेंट भ‌इल।

लाल लुगा फाट ग‌इल, चमकल मेंट ग‌इल।।
दीन दशा देख के अब आंख भर आवता।
केहू के कवनों बात अब तनको ना सुहावता।।
रहे जब जवानी त सब लोग भरे पानी।
फुसुर फुसुर क के कहे सब तोहरे कहानी ।।
मन कबहूँ सोचलस ना, अइसनो दिन आई।
धीरे धीरे सबे छुटत ग‌इल, छुटल बाप माई।।
पुरनिया लोग कहत रहे, बुढ़ौती दुखदायी ह।
ओइसने भोगे के परेला, ज‌इसन जेकर कमाई ह।। 
 जय प्रकाश कुवंर
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ