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कुक्कुर बनाम नेता

कुक्कुर बनाम नेता

गीता में कह गए कृष्ण.
कि ऐसा कलयुग आएगा।
भाई ही भाई के रक्त का,
खुद प्यासा बन जाएगा।

कलयुग में नेता से अच्छे,
कुत्ते ही कहलाएंगे।
वफादारी के पाठ उन्हें,
कुत्ते ही सिखलाएंगे ।

कुत्ते जिनका खाते हैं,
उनका ही गुण गाते हैं।
वक्त आने पर वे सदा,
मालिक की जान बचाते हैं।

पर नेता जिनका खाते हैं,
उन्हें ही चूना लगाते हैं।
वक्त आने पर वे नेता,
उनका ही कत्ल करवाते हैं।

जिनके कारण मिलती है कुर्सी,
उन्हें ही आँख दिखाते हैं।
जनता की बहू-बेटियों को ही,
नित्य हवस का शिकार बनाते हैं।

बंधुत्व व भाईचारे को त्याग,
नित्य जनता को लड़वाते हैं।
उनके ही गर्म रक्तों से वे,
खुशियों के दीप जलाते हैं।

मानवता की कर हत्या,
दानवता की मान बढ़ाते हैं।
भंग कर मानव की शांति,
अशांति का साम्राज्य के फैलाते हैं।

कोई मरेगा भूखे तो,
कोई लड़कर ही मर जाएगा।
बैठ मुर्दों के आसन पर नेता,
देश का शासन चलाएगा।

सुरेन्द्र कुमार रंजन
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