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तुम्हारे नयनन, नेह अमिय धार

तुम्हारे नयनन, नेह अमिय धार

नेह प्रस्ताव स्वीकृति ।
मृदुल भाव तरंगिणी,
उर शोभ प्रिय आकृति ।
आनंद निर्झर परिवेश,
गौण बिंदु निज आकार ।
तुम्हारे नयनन, नेह अमिय धार ।।


चाल ढाल हाव भाव,
अब परिवर्तन ओर ।
पुनीत भाव भंगिमा,
कामना मिलन छोर ।
जग पटल विजय भव,
पर प्रीत संग हार स्वीकार ।
तुम्हारे नयनन, नेह अमिय धार ।।


विस्मृत निज अस्मिता,
निहार मद मस्त चक्षु ।
उपमा वैभव पराकाष्ठा,
स्व आकलन सदृश भिक्षु ।
कोष्ठ प्रकोष्ठ अभिलाष रस,
भाव विभोर चितवन आधार ।
तुम्हारे नयनन, नेह अमिय धार ।।


स्वर व्यंजना विश्रांत,
मौन रूप शब्द कोश ।
अंतःकरण पट परिशुद्घ ,
मुस्कान सम परितोष ।
अंतरंग दिव्य प्रेम सिंधु,
तृषा तृप्ति अवस्ती अपार ।
तुम्हारे नयनन, नेह अमिय धार ।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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