महामूर्ख सम्मेलन के संस्थापक : विश्वनाथ शुक्ल‘ चंचल ‘

दुर्गेश मोहन

काफी प्रसिद्धि पाई। इनके द्वारा लिखित पत्र पत्रिकाओं में लगभग 2000 रचनाएं प्रकाशित हुई ,जो साहित्य की शोभा बढ़ाई और धरोहर साबित हुई ।इनकी लिखी लगभग 200 नाटकों का प्रसारण आकाशवाणी पटना से हुई थी ,जो श्रोताओं के बीच काफी प्रशंसनीय थी। आकाशवाणी पटना और दूरदर्शन पटना से प्रसारित गणेश वंदना प्रसिद्ध थी ।इनके द्वारा रचित ‘मतलबी दोस्तों से कैसे मिले‘ ( हास्य व्यंग्य)को काफी सराहना मिली। बनारस से प्रकाशित समाचार पत्र आज में साप्ताहिक धारावाहिक में व्यंग्य रचना ‘डाल _डाल के पात ‘ निकली थी ,जो पाठकों के दिलों पर छा गई थी ।इसके अतिरिक्त रामचंद्र जायसवाल ,डॉक्टर पूर्णेन्दु नारायण सिन्हा,(जीवनी),पुष्टिमार्ग का हवेली संगीत (निबंध), दीपावली ,कारगिल( कविता) संबंधित आदि उत्कृष्ट रचनाएं थीं, जो पाठकों के मध्य सराही गई ।चंचल जी लगभग छः दशक तक पत्रकारिता का अहर्निश सेवा किए।इन्होंने विभिन्न विधाओं में रचनाओं का सृजन किया ।जैसे आलेख ,कविता ,संस्मरण ,नाटक, व्यंग्य इत्यादि।इन्होंने रंगमंच की स्थापना 1954 में हाजीगंज, पटना सिटी में किया। ये संस्था के संस्थापक निदेशक थे। यह संस्था साहित्य एवं कला संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था ।विश्वनाथ शुक्ल ’चंचल ‘कौमुदी महोत्सव और महामूर्ख सम्मेलन के संस्थापक थे । ये निष्ठापूर्वक इसे प्रति वर्ष मनाया करते थे, जो ऐतिहासिक था ।इन दोनों आयोजनों में चंचल जी शुभारंभ स्वरचित गणेश वंदना से करते थे।जिसके बोल थे _या गणेश बुद्धि हर ली जै ,क्षण में मेरा सब कुछ हर ली जै ...इस कार्यक्रम में महान हस्तियां भाग ले चुके थे,जिसमें कई सम्मानित भी हुए थे।जैसे बिस्मिल्लाह खां ,गिरिजा देवी ,शारदा सिन्हा, विंध्यवासिनी देवी, श्यामदास मिश्र, अजीत कुमार अकेला, अनूप जलोटा ,डॉक्टर श्रीरंजन सूरिदेव ,राधामोहन,दामोदर प्रसाद अम्बष्ठ,नंदकिशोर यादव, श्याम रजक ,डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा ,डॉक्टर शैलेंद्रनाथ श्रीवास्तव ,केशव कुमार सोनी, राजेंद्र प्रसाद‘ मंजुल ‘इत्यादि। इस प्रकार यह संस्था अपने आप में अनूठा था ।ये प्रतिष्ठित पत्र_ पत्रिकाओं के माध्यम से पाठकों को लाभान्वित किए ।आप आकाशवाणी पटना और दूरदर्शन पटना से कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जो सराहनीय रहा ।चंचल जी अपने चाचा जगन्नाथ शुक्ल से प्रभावित एवं प्रेरित होकर सफल साहित्यकार_ रंगकर्मी बने। इन पर अपने चाचा की अमिट छाप पड़ी।इनके चाचा जगन्नाथ शुक्ल बिहार की प्रथम भोजपुरी फिल्म गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो में मास्टर साहब का अभिनय कर प्रसिद्धि पाए ।ये आकाशवाणी पटना से प्रसारित कार्यक्रम चौपाल में पटवारी जी के किरदार को निभाए ,जो प्रशंसनीय थी। इनके तीन पुत्र तथा तीन पुत्रियां हैं ।इनके दो पुत्र पत्रकारिता से संबद्ध हैं ।वरीय पत्रकार रजनीकांत शुक्ल (आज ,पटना) एवं वरीय पत्रकार रविकांत शुक्ल (राष्ट्रीय सहारा, पटना )में अपना योगदान दे रहे हैं ।चंचल जी द्वारा लिखित आनंद भवन से अखंड भवन (आलेख ) काफी प्रशंसनीय रही ।
महामूर्ख सम्मेलन के स्वर्ण जयंती पर हॉलीवुड अमेरिका से पटना टीम विश्वनाथ शुक्ल ‘चंचल ‘से मिली थी ।चंचल जी एवं महामूर्ख सम्मेलन को आधार बनाकर एक वीडियो कैसे तैयार किया गया ,जो दूरदर्शन लंदन से प्रसारित हुआ ,जो हर्ष एवं गर्व की बात है ।इन्हें बहुत पुरस्कार/ सम्मान से सम्मानित किया गया, जो प्रमुख थे _भूतपूर्व तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी द्वारा नारायणी कला इंटर विद्यालय के शताब्दी समारोह में सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण महा संगठन द्वारा बिहार गौरव सम्मान, पाटलिपुत्र परिषद द्वारा कौमुदी रत्न सम्मान ,आनंद शास्त्री हिंदी राष्ट्रीय विकास संस्थान द्वारा बिहार गौरव सम्मान, नव शक्ति निकेतन द्वारा साहित्य एवं समाज सेवा सम्मान ,संस्कार भारती के अमृत महोत्सव में संगीत, साहित्य एवं कला के लिए पद्मश्री शैलेंद्रनाथ श्रीवास्तव द्वारा सम्मान, कौमुदी महोत्सव 2017 लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, 15वां पाटलिपुत्र साहित्य महोत्सव में सुरेंद्र प्रताप सिंह पत्रकारिता एवं जनसंचार संस्थान द्वारा सम्मान ,शाद अजीमाबादी स्टडी सर्किल द्वारा साहित्य एवं समाज सेवा सम्मान, मानवोदय संस्था के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ‘मंजुल ’ एवं महासचिव प्रभात कुमार धवन के द्वारा संयुक्त रूप से पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में साधना सम्मान, श्री छोटी पटनदेवी शक्तिपीठ द्वारा पत्रकारिता एवं साहित्य के लिए 2022में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा पत्रकारिता एवं साहित्य के लिए बिहार का सबसे बड़ा सम्मान 2023 में मरणोपरांत लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड ,जो उनके पुत्र रविकांत शुक्ल ने ग्रहण किया।
चंचल जी साहित्य एवं पत्रकारिता के आधार स्तंभ थे।
ये हमारे प्रेरणास्रोत थे ।इनका देहावसान 11 दिसंबर, 2022 को करीब 90 वर्ष की अवस्था में हाजीगंज ,पटना सिटी स्थित अपने आवास पर हो गया ।हमें इनसे सीख लेनी चाहिए ।आज ये हमारे बीच नहीं हैं ,लेकिन कीर्ति हमेशा के लिए हमारे जेहन में रहेंगे । फूल सूखकर बिखर गए ,लेकिन सुवास बनी रहे ।
पत्रकार विश्वनाथ शुक्ल ‘चंचल‘ के प्रति स्वरचित श्रद्धांजलि समर्पित है _
चंचल जी का पत्रकारिता में था अहम योगदान ।
इन्होंने बनाई अपनी
अमिट पहचान।
साहित्य सृजित कर
किए यशोगान।
और ये हमेशा _हमेशा के लिए हम सबों के रहेंगे वरदान।
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