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इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर।

इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर।

भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में पिछले साल २२ जनवरी २०२४ को राम लला के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था। इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक आज, यानि २२ जनवरी २०२५ , दिन बुधवार को राम मन्दिर और प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगाँठ है। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगाँठ उत्सव पूर्वक मनाने के लिए जबरदस्त तैयारी हुई रही है और अयोध्या पूर्णतः सज धज कर वैसे ही तैयार है।
चूंकि हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक इस साल ११ जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा का वर्षगाँठ मनाया जा चुका है अतः श्री राम मन्दिर ट्रस्ट की तरफ से आज कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। फिर भी अयोध्या सदा से ही सुसज्जित,पवित्र और सुन्दर श्री राम का धाम है। जहाँ श्री राम विराजमान हैं वहां हर समय आनंद और उल्लास है।
त्रेतायुग में भगवान श्री राम अपने जन्मभूमि अयोध्या के बारे में वन से अपने मित्रों के साथ पुष्पक विमान से लौटते हुए उनसे कहते हैं , जैसा कि श्रीरामचरितमानस में संत तुलसीदास जी ने वर्णन किया है :-
इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर।
कपिन्ह देखावत नगर मनोहर।।
सुनु कपीस अंगद लंकेसा।
पावन पुरी रुचिर यह देसा।।
जद्यपि सब बैकुंठ बखाना।
बेद पुरान बिदित जगु जाना।।
अवधपुरी सम प्रिय नहीं सोऊ।
यह प्रसंग जान‌इ कोउ कोऊ।।
जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि।
उत्तर दिशि बह सरजू पावनि।।
जा मज्जन ते बिनहि प्रयासा।
मम समीप नर पावहिं वासा।।
अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी।
मम धामदा पुरी सुख रासी।।
हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी।
धन्य अवध जो राम बखानी।।
उस समय वनवास से अयोध्या लौटने पर प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक भी अति हर्ष उल्लास के साथ हुआ था। जैसा कि श्रीरामचरितमानस में संत तुलसीदास जी ने वर्णन किया है :-
प्रभु बिलोकि मुनि मन अनुरागा।
तुरत दिव्य सिंंघासन मागा।।
रवि सम तेज सो बरनि न जाई।
बैठे राम द्विजन्ह सिरु नाई।।
प्रथम तिलक बसिष्ठ मुनि कीन्हा।
पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा।।
सिंघासन पर त्रिभुवन साईं।
देखि सुरन्ह दुंदुभि बजाई।।
इस तरह अब इस कलियुग में भी भगवान श्री राम को अपने राम मन्दिर पावन अयोध्या धाम में विराजते हुए देखना बड़े ही भाग्य और हर्ष की बात है। उनके प्राण प्रतिष्ठा के पहले वर्षगाँठ के अवसर पर उनके श्री चरणों में मेरा अनेकों बार भक्ति भावपूर्ण नमन और समस्त देशवासियों को अनेकों शुभकामनायें और बधाईयाँ। 🙏🙏🙏🙏🙏 जय प्रकाश कुवंर
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