महाशिवरात्रि विशेष.jpg)
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हर हर महादेव!!
लेखक: रवि शेखर सिन्हा उर्फ आचार्य मनमोहन। ज्योतिष मार्तंड एवं जन्म कुंडली विशेषज्ञ।
महाशिवरात्रि बड़ा ही अद्भुत पर्व है। तीन महारात्रिओं में से एक महाशिवरात्रि को माना गया है। महाशिवरात्रि की रात में अर्थात सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय तक जागते रहने से बड़ा ही चमत्कारिक लाभ होता है। महाशिवरात्रि की रात को अपनी रीढ़ की हड्डियों को सीधा रखते हुए जागृत अवस्था में बैठना, चलना या साधना करते रहना बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे हमारे शरीर के सातों चक्रों को शक्ति मिलती है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वैसे तो कई प्रकार की वस्तुओं से महादेव का अभिषेक किया जाता है। किंतु महाशिवरात्रि पर धन प्राप्ति के लिए कुछ विशेष अभिषेक किए जाते हैं, जो सभी लग्न और राशि वालों के लिए लाभकारी है।
भगवान विष्णु का जन्म बुधवार के दिन माना जाता है और माता लक्ष्मी का जन्म शुक्रवार को माना जाता है। इसीलिए बुध ग्रह का संबंध भगवान विष्णु से और शुक्र ग्रह का संबंध माता लक्ष्मी से होता है। जीवन में लक्ष्मी नारायण अर्थात विशेष धन लाभ के लिए यह प्रयोग करना चाहिए। हरी इलायची बुध की सबसे प्रिय वस्तु है और मिश्री शुक्र ग्रह की सबसे प्रिय वस्तु है। इसके साथ ही शुक्र को सुगंध अर्थात इत्र बहुत ही प्रिय होता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का इन्हीं वस्तुओं से अभिषेक करना चाहिए। साथ ही साथ इस संसार का प्रत्येक व्यक्ति कभी ना कभी शनिदेव की पीड़ा से अवश्य गुजरता है। महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती, ढैया, पनौती शनि के रूप में शनिदेव सदैव कष्ट देते हैं। इन सब के निवारण के लिए तिल का प्रयोग करना चाहिए। सर्वप्रथम चांदी या पीतल के लोटे में जल भर लें। उस जल में एक मुट्ठी काला तिल मिला लें और उससे भगवान शिव के ऊपर अभिषेक करें शनि देव का मंत्र बोलते हुए। फिर उसके बाद वापस लोटे में जल भरें और उसमें थोड़ा सा इत्र गुलाब का या चंदन का मिला लें और उस इत्र मिले हुए जल से भगवान शिव का अभिषेक महामृत्युंजय मंत्र बोलते हुए या ओम नमः शिवाय का पाठ करते हुए अर्पित करें। उसके बाद पुनः एक लोटा जल लेकर उस जल में थोड़ा सा हरी इलायची का पाउडर और थोड़ा सा मिश्री अच्छी तरह से मिला लें और इस जल को भगवान शिव के ऊपर अभिषेक करते हुए पहले ओम नमः शिवाय बोलें। फिर बुध का मंत्र ओम बुं बुधाय नमः उसके बाद शुक्र का मंत्र ओम शुं शुक्राय नमः बोलते हुए अभिषेक करें।
फिर उसके बाद बेलपत्र, फूल, धतूरा, मंदार पत्र पुष्प, नैवेद्य, फल इत्यादि धूप दीप भगवान शिव को अर्पित करें।
26 फरवरी 2025 बुधवार को महाशिवरात्रि है। इस दिन भद्रा व्याप्त होने के कारण सुबह 11:08 से रात के 10:05 तक भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत अधिक शुभ फलदायक नहीं होगा। अतः भद्रा से पहले अथवा भद्रा के बाद भगवान शिव का ऊपर बताए गए तरीके से अभिषेक करें। अवश्य ही चमत्कारिक लाभ होगा।
ओम नमः शिवाय। नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव!!
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