अब तुम्हीं बता वह है कौन
संत समागम में रह रहा हो ,जो राष्ट्रधर्म में ही बह रहा हो ,
जो हर सितम को सह रहा हो
जो न्याय पक्ष को गह रहा हो ।
धर्मचित्त जिसके गहरा रहा है ,
धर्मध्वज जिसका लहरा रहा है ,
न्याय धर्म का वही तो डौन है
अब मुॅंह तो खोलो क्यूॅं मौन है ।
जन जन को जो दिखलाया है ,
अपना कर्म धर्म जो निभाया है ,
किसी का दिल नहीं दुखाया है ,
कलि में सत्य को जो लाया है ।
सत्ययुग का हरिश्चंद्र त्रेता राम ,
द्वापर युग का कृष्ण बलराम ,
कलियुग का जैसे हों पुत्र पौन ,
अब खुलकर बता वह है कौन ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
डुमरी अड्डा
छपरा ( सारण )बिहार ।
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