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मोहब्बत मेरा आधार

मोहब्बत मेरा आधार

मेरे लिखने का आधार तुम हो।
मेरे जीवन की प्रेरणा तुम हो।
मेरी मोहब्बत भी तुम हो।
सच कहे तो तुम ही सब कुछ हो।।


जब भी याद करता हूँ तुम्हें।
तुम नया करने को कहते हो।
इसलिए नई कविता लिख देता हूँ।
जिसका श्रेय मैं तुमको देता हूँ।।


इसे मैं सरस्वती का वरदान कहूँ।
या तेरे साथ होने के एहसान कहूँ।
मैं तो दोनों का ही एहसान बंध हूँ।
जो आप दोनों मेरे साथ हो।।


जिस दिन एक भी रूठ गये मुझसे।
उस दिन से लिखना बंद हो जायेगा।
और इस लेखक का अंत हो जायेगा।
इसलिए अपना साथ बनाये रखना।।


जय जिनेंद्र

संजय जैन "बीना" मुंबई
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