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प्रेम कोई व्यापार नहीं

प्रेम कोई व्यापार नहीं

दो दिलों का संगम है ये धड़कनों की राग है।
भावों का उमड़ता सिंधु हृदय का अनुराग है।
प्रीत का पावन रिश्ता जंग जीत या हार नहीं।
महकता फूल गुलाब प्रेम कोई व्यापार नहीं।


जुड़े होते तार दिलों के जन्मों जन्मों का रिश्ता।
बढ़ता जाता दिनोंदिन प्यार शनै शनै आहिस्ता।
प्यार का सागर बहता डूबती हुई पतवार नहीं।
सच्चा स्नेह अनमोल है प्रेम कोई व्यापार नहीं।


इंतजार की वो घड़ियां बेताबी बढ़ती पल-पल।
प्रियतम का प्रेम सलोना नैन नेह झरता सरल।
वादों का बाजार नहीं दो दिलों का करार नहीं।
दूर रह कर पास होता प्रेम कोई व्यापार नहीं।


सुख-दुख का पूर्वाभास चेहरा हसीन खास हो।
मौसम में मधुमास प्रिय अंधियारे में उजास हो।
दीपक की रोशनी है छल छदम अंधकार नहीं।
हृदय की लहरें पावन प्रेम कोई व्यापार नहीं।


रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान रचना स्वरचित व मौलिक है
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