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दुर्गा सप्तशती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है

दुर्गा सप्तशती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है


उपसंपादक जितेन्द्र कुमार सिन्हा जी की कलम से |
देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा सप्तशती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है, जबकि साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि के अनुसार, 52 शक्ति पीठ निम्न प्रकार है :-

शर्कररे (करवीर) शक्तिपीठ


यह शक्तिपीठ पाकिस्तान में कराची के सुक्कर स्टेशन के निकट स्थित है। शर्कररे शक्तिपीठ में माता की आँख गिरी थी। इसकी शक्ति- महिषासुरमर्दिनी और भैरव को क्रोधिश कहते हैं।


हिंगलाज शक्तिपीठ


यह शक्तिपीठ पाकिस्तान में कराची से 125 किमी उत्तर पूर्व में स्थित है, हिंगलाज शक्तिपीठ में माता का ब्रह्मरंध (सिर) गिरा था। इसकी शक्ति- कोटरी (भैरवी-कोट्टवीशा) है और भैरव को भीमलोचन कहते हैं।


सुगंधा- सुनंदा


यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के शिकारपुर में बरिसल से 20 किमी दूर सोंध नदी के किनारे स्थित है, माँ सुगंधा- सुनंदा में माता की नासिका गिरी थी। इसकी शक्ति है सुनंदा और भैरव को त्र्यंबक कहते हैं।


*भवानी*


यह शक्तिपीठ बांग्लादेश में चिट्टागौंग (चटगाँव) जिला के सीताकुंड स्टेशन के निकट ‍चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल (चट्टल या चहल) में स्थित है। भवानी में माता की दायीं भुजा गिरी थी। इसकी शक्ति भवानी है और भैरव को चंद्रशेखर कहते हैं।


*जयंती*


यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के सिल्हैट जिले के जयंतीया परगना के भोरभोग गाँव कालाजोर के खासी पर्वत पर जयंती मंदिर स्थित है। जयंती में माता की बायीं जंघा गिरी थी। इसकी शक्ति है जयंती और भैरव को क्रमदीश्वर कहते हैं।


*महालक्ष्मी*


यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के सिल्हैट जिले के उत्तर-पूर्व में जैनपुर गाँव के पास शैल नामक स्थान पर स्थित है। महालक्ष्मी में माता का गला (ग्रीवा) गिरा था। इसकी शक्ति है महालक्ष्मी और भैरव को शम्बरानंद कहते हैं।


*अर्पण*


यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के शेरपुर बागुरा स्टेशन से 28 किमी दूर भवानीपुर गाँव के पार करतोया तट स्थान पर स्थित है। अर्पण में माता की पायल (तल्प) गिरी थी। इसकी शक्ति है अर्पण और भैरव को वामन कहते हैं।


*यशोरेश्वरी*


यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के खुलना जिला के ईश्वरीपुर के यशोर स्थान पर स्थित है। यशोरेश्वरी में माता के हाथ और पैर गिरे (पाणिपद्म) थे। इसकी शक्ति है यशोरेश्वरी और भैरव को चण्ड कहते हैं।


*महशिरा (महामाया)*


यह शक्तिपीठ नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के निकट स्‍थित है गुजरेश्वरी मंदिर। महामाया में माता के दोनों घुटने (जानु) गिरे थे। इसकी शक्ति है महशिरा (महामाया) और भैरव को कपाली कहते हैं।


*गंडकी*


यह शक्तिपीठ नेपाल में गंडकी नदी के तट पर पोखरा नामक स्थान पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर है। गंडकी माता का मस्तक या गंडस्थल अर्थात कनपटी गिरी थी। इसकी शक्ति है गंडकी चण्डी और भैरव चक्रपाणि हैं।


*दाक्षायनी*


यह शक्तिपीठ तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट एक पाषाण शिला पर स्थित है। दाक्षायनी में माता का दायाँ हाथ गिरा था। इसकी शक्ति है दाक्षायनी और भैरव अमर हैं।


*इंद्राक्षी*


यह शक्तिपीठ श्रीलंका में (संभवत:) त्रिंकोमाली में प्रसिद्ध त्रिकोणेश्वर मंदिर के निकट स्थित है। इंद्राक्षी में माता की पायल गिरी थी। इसकी शक्ति है इंद्राक्षी और भैरव को राक्षसेश्वर कहते हैं।


*महामाया*


यह शक्तिपीठ भारत के कश्मीर में पहलगाँव के निकट स्थित है। कश्मीर- महामाया में माता का कंठ गिरा था। इसकी शक्ति है महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहते हैं।


*सिद्धिदा (अंबिका)*


यह शक्तिपीठ भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित है। सिद्धिदा (अंबिका) में माता की जीभ गिरी थी। उसे ज्वालाजी स्थान भी कहते हैं। इसकी शक्ति है सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव को उन्मत्त कहते हैं।

*त्रिपुरमालिनी*


यह शक्तिपीठ पंजाब के जालंधर में छावनी स्टेशन के निकट देवी तलाब में स्थित है। त्रिपुरमालिनी में माता का बायाँ वक्ष (स्तन) गिरा था। इसकी शक्ति है त्रिपुरमालिनी और भैरव को भीषण कहते हैं।


*त्रिपुर सुंदरी*


यह शक्तिपीठ त्रिपुरा के उदरपुर के निकट राधाकिशोरपुर गाँव के माताबाढ़ी पर्वत शिखर पर स्थित है। त्रिपुर सुंदरी में माता का दायाँ पैर गिरा था। इसकी शक्ति है त्रिपुर सुंदरी और भैरव को त्रिपुरेश कहते हैं।

*जयदुर्गा*


यह शक्तिपीठ झारखंड के देवघर में वैद्यनाथधाम में स्थित है। जयदुर्गा में माता का हृदय गिरा था। इसकी शक्ति है जय दुर्गा और भैरव को वैद्यनाथ कहते हैं।


*विरजाक्षेत्र*


यह शक्तिपीठ उड़ीसा के विराज में उत्कल स्थित जगह पर स्थित है। विरजाक्षेत्र में माता की नाभि गिरी थी। इसकी शक्ति है विमला और भैरव को जगन्नाथ कहते हैं।


*बहुला (चंडिका)*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल से वर्धमान जिला से 8 किमी दूर कटुआ केतुग्राम के निकट अजेय नदी तट पर स्थित बाहुल स्थान पर है। बहुला (चंडिका) में माता का बायाँ हाथ गिरा था। इसकी शक्ति है देवी बाहुला और भैरव को भीरुक कहते हैं।


*मंगल चंडिका*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल में वर्धमान जिले से 16 किमी दूर गुस्कुर स्टेशन से उज्जय‍िनी नामक स्थान पर स्थित है। मंगल चंडिका में माता की दायीं कलाई गिरी थी। इसकी शक्ति है मंगल चंडिका और भैरव को कपिलांबर कहते हैं।


*भ्रामरी*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के बोडा मंडल के सालबाढ़ी ग्राम स्‍थित त्रिस्रोत स्थान पर स्थित है। भ्रामरी में माता का बायाँ पैर गिरा था। इसकी शक्ति है भ्रामरी और भैरव को अंबर और भैरवेश्वर कहते हैं।


*भूतधात्री*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के खीरग्राम स्थित जुगाड्‍या (युगाद्या) स्थान पर स्थित है। भूतधात्री में माता के दाएँ पैर का अँगूठा गिरा था। इसकी शक्ति है भूतधात्री और भैरव को क्षीर खंडक कहते हैं।


*कालिका*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के कोलकाता के कालीघाट में स्थित है। कालिका में माता के बाएँ पैर का अँगूठा गिरा था। इसकी शक्ति है कालिका और भैरव को नकुशील कहते हैं।


*विमला (भुवनेशी)*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद जिला के लालबाग कोर्ट रोड स्टेशन के किरीटकोण ग्राम के पास स्थित है। विमला (भुवनेशी) में माता का मुकुट गिरा था। इसकी शक्ति है विमला और भैरव को संवर्त्त कहते हैं।


*देवगर्भा*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बीरभुम जिला के बोलारपुर स्टेशन के उत्तर पूर्व स्थित कोपई नदी तट पर कांची नामक स्थान पर स्थित है। देवगर्भा में माता की अस्थि गिरी थी। इसकी शक्ति है देवगर्भा और भैरव को रुरु कहते हैं।


*कपालिनी (भीमरूप)*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के जिला पूर्वी मेदिनीपुर के पास तामलुक स्थित विभाष स्थान पर स्थित है। कपालिनी (भीमरूप) में माता की बायीं एड़ी गिरी थी। इसकी शक्ति है कपालिनी (भीमरूप) और भैरव को शर्वानंद कहते हैं।


*कुमारी*


यह शक्तिपीठ बंगाल के हुगली जिले के खानाकुल-कृष्णानगर मार्ग पर रत्नावली स्थित रत्नाकर नदी के तट पर स्थित है। कुमारी में माता का दायाँ स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है कुमारी और भैरव को शिव कहते हैं।


*कालिका देवी*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के नलहाटि स्टेशन के निकट नलहाटी में स्थित है। कालिका देवी में माता के पैर की हड्डी गिरी थी। इसकी शक्ति है कालिका देवी और भैरव को योगेश कहते हैं।


*महिषमर्दिनी*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के दुबराजपुर स्टेशन से सात किलो मीटर दूर वक्रेश्वर में पापहर नदी के तट पर स्थित है। महिषमर्दिनी में माता का भ्रूमध्य (मन:) गिरा था। इसकी शक्ति है महिषमर्दिनी और भैरव को वक्रनाथ कहते हैं।


*फुल्लरा*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के लाभपुर स्टेशन से दो किमी दूर अट्टहास स्थान पर स्थित है। फुल्लरा में माता के ओष्ठ गिरे थे। इसकी शक्ति है फुल्लरा और भैरव को विश्वेश कहते हैं।


*नंदिनी*


यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के सैंथिया रेलवे स्टेशन नंदीपुर स्थित चारदीवारी में बरगद के वृक्ष के समीप स्थित है। नंदिनी में माता के गले का हार गिरा था। इसकी शक्ति है नंदिनी और भैरव को नंदिकेश्वर कहते हैं।


*कामाख्या*


यह शक्तिपीठ असम के गुवाहाटी जिले के कामगिरि क्षेत्र में स्‍थित नीलांचल पर्वत के कामाख्या स्थान पर स्थित है। कामाख्या में माता का योनि भाग गिरा था। इसकी शक्ति है कामाख्या और भैरव को उमानंद कहते हैं।


*ललिता*


यह शक्तिपीठ उत्तरप्रदेश के इलाहबाद शहर (प्रयाग) के संगम तट पर स्थित है। ललिता में माता की हाथ की अँगुली गिरी थी। इसकी शक्ति है ललिता और भैरव को भव कहते हैं।


*विशालाक्ष मणिकर्णी*


यह शक्तिपीठ उत्तरप्रदेश के काशी में मणिकर्णीक घाट पर स्थित है। विशालाक्ष मणिकर्णी में माता के कान के मणिजड़ीत कुंडल गिरे थे। इसकी शक्ति है विशालाक्ष मणिकर्णी और भैरव को काल भैरव कहते हैं।


*शिवानी*


यह शक्तिपीठ उत्तरप्रदेश के झाँसी-मणिकपुर रेलवे स्टेशन चित्रकूट के पास रामगिरि स्थान पर स्थित है। शिवानी में माता का दायाँ वक्ष गिरा था। इसकी शक्ति है शिवानी और भैरव को चंड कहते हैं।


*उमा*


यह शक्तिपीठ उत्तरप्रदेश के मथुरा के निकट वृंदावन के भूतेश्वर स्थान पर स्थित है। उमा में माता के गुच्छ और चूड़ामणि गिरे थे। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को भूतेश कहते हैं।


*सर्वाणी*


यह शक्तिपीठ तमिलनाडु के तीन सागर हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है। सर्वाणी में माता का पृष्ठ भाग गिरा था। इसकी शक्ति है सर्वाणी और भैरव को निमिष कहते हैं।


*नारायणी*


यह शक्तिपीठ तमिलनाडु के कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग पर (शुचितीर्थम शिव मंदिर है) स्थित है। नारायणी में माता की ऊपरी दंत (ऊर्ध्वदंत) गिरे थे। इसकी शक्ति है नारायणी और भैरव को संहार कहते हैं।


*सावित्री*


यह शक्तिपीठ हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है। सावित्री में माता की एड़ी (गुल्फ) गिरी थी। इसकी शक्ति है सावित्री और भैरव को स्थाणु कहते हैं।


*गायत्री*


यह शक्तिपीठ अजमेर के निकट पुष्कर के मणिबन्ध स्थान के गायत्री पर्वत पर स्थित है। गायत्री में दो मणिबंध गिरे थे। इसकी शक्ति है गायत्री और भैरव को सर्वानंद कहते हैं।


*काली*


यह शक्तिपीठ मध्यप्रदेश के अमरकंटक के कालमाधव स्थित शोन नदी तट के पास स्थित है। काली में माता का बायाँ नितंब गिरा था जहाँ एक गुफा है। इसकी शक्ति है काली और भैरव को असितांग कहते हैं।


*नर्मदा (शोणाक्षी)*


यह शक्तिपीठ मध्यप्रदेश के अमरकंटक स्थित नर्मदा के उद्गम पर शोणदेश स्थान पर स्थित है। नर्मदा (शोणाक्षी) में माता का दायाँ नितंब गिरा था। इसकी शक्ति है नर्मदा और भैरव को भद्रसेन कहते हैं।


*अवंति*


यह शक्तिपीठ मध्यप्रदेश के ‍उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट के पास भैरव पर्वत पर स्थित है। अवंति में माता के ओष्ठ गिरे थे। इसकी शक्ति है अवंति और भैरव को लम्बकर्ण कहते हैं


*वराही*


यह शक्तिपीठ पंचसागर (अज्ञात स्थान) में, अधिकांश लोगों का मानना है कि यह स्थान वाराणसी पंच सागर क्षेत्र में है। जबकि छत्तीसगढ़ के दन्तवाड़ा में और उत्तराखंड के लोहाघाट नगर से 60 किलोमीटर दूर देवीधुरा में भी मंदिर है। वराही में माता की निचले दंत (अधोदंत) गिरे थे। इसकी शक्ति है वराही और भैरव को महारुद्र कहते हैं।


*श्रीसुंदरी*


यह शक्तिपीठ कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के पर्वत पर स्थित है। श्रीसुंदरी में माता के दाएँ पैर की पायल गिरी थी।
दूसरी मान्यता अनुसार, आंध्रप्रदेश के कुर्नूल जिले के श्रीशैलम स्थान पर स्थित है। श्रीसुंदरी में माता का दक्षिण गुल्फ अर्थात दाएँ पैर की एड़ी गिरी थी। इसकी शक्ति है श्रीसुंदरी और भैरव को सुंदरानंद कहते हैं।


*राकिनी*


यह शक्तिपीठ आंध्रप्रदेश के राजामुंद्री क्षेत्र स्थित गोदावरी नदी के तट पर कोटिलिंगेश्वर मंदिर के पास सर्वशैल स्थान पर स्थित है। राकिनी में माता के वाम गंड (गाल) गिरे थे। इसकी शक्ति है राकिनी और भैरव को वत्सनाभम कहते हैं।


*चंद्रभागा*


यह शक्तिपीठ गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित सोमनाथ मंदिर के निकट वेरावल स्टेशन से 4 किलोमीटर प्रभास क्षेत्र में स्थित है। चंद्रभागा में माता का उदर गिरा था। इसकी शक्ति है चंद्रभागा और भैरव को वक्रतुंड कहते हैं।


*भ्रामरी*


यह शक्तिपीठ महाराष्ट्र के नासिक नगर स्थित गोदावरी नदी घाटी स्थित जनस्थान पर स्थित है। भ्रामरी में माता की ठोड़ी गिरी थी। इसकी शक्ति है भ्रामरी और भैरव को विकृताक्ष कहते हैं।


*विश्वेश्वरी*


यह शक्तिपीठ आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी के पास गोदावरी के किनारे कोटिलेश्वर मंदिर में स्थित है। विश्वेश्वरी में माता के दक्षिण गंड गिरे थे। इसकी शक्ति है विश्वेश्वरी और भैरव को दंडपाणि कहते हैं।


*उमा (महादेवी)*


यह शक्तिपीठ भारत-नेपाल सीमा पर जनकपुर रेलवे स्टेशन के निकट मिथिला में स्थित है। उमा (महादेवी) में माता का बायाँ स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को महोदर कहते हैं।


*जयदुर्गा*


यह शक्तिपीठ कर्नाट (अज्ञात स्थान) ऐसे माता को कर्नाट वंश का बताया जाता है और नेनाल के मिथिला से संबंधित माना जाता है। जबकि कर्नाटक में जयदुर्गा के रूप में स्थित है। जयदुर्गा में माता के दोनों कान गिरे थे। इसकी शक्ति है जयदुर्गा और भैरव को अभिरु कहते हैं।


*अंबिका*


यह शक्तिपीठ राजस्थान के विराट नगर कस्बे में अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है। अंबिका में बाये पैर की चार अँगुली गिरी थी। इसकी शक्ति है अंबिका और भैरव को अमृत कहते हैं। -----------
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