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पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से कराई गई गणना,गोगाबील झील में बढ़ी देशी व विदेशी पक्षियों की संख्या

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से कराई गई गणना,गोगाबील झील में बढ़ी देशी व विदेशी पक्षियों की संख्या

सुरेन्द्र कुमार रंजन
बिहार के एशियाई मध्य शीतकालीन जलपक्षी गणना कार्यक्रम के तहत राज्य के अति समृद्ध पक्षी क्षेत्र गोगाबील झील के साथ कटिहार जिले के सात ज‌लाशयों के पक्षियों की गणना की गई। गोगाबील झील के अलावा गेड़ाबाड़ी पार्क, भवारा कोठी, कनचिरा, बल्दिया चौर, कठौतिया पौंड और बघार बील भी शामिल है। पक्षियों की की गणना बिहार के जानेमाने पक्षीविद् अरविन्द मिश्रा के नेतृत्व में की गई। इस टीम में भागलपुर के बिट्टू कुमार, गरुडों के प्रजनन स्थल कद‌वा दियारा के संतोष कुमार, गेड़ाबाड़ी के अंशुमन जयपुरियार,भवारा कोठी के अमरेश कुमार चौधरी व राजन कुमार एवं कटिहार की श्वेता कश्यप शामिल थे। मनिहारी अमदाबाद के वनरक्षी नीतीश कुमार एवं सुरेन्द्र कुमार भी इस गणना में शामिल रहे। कटिहार के वन क्षेत्र पदाधिकारी सत्येन्द्र झा एवं वन प्रमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन का इस कार्यक्रम में पूरा सहयोग रहा । इसमें बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी का तकनीकी सहयोग भी रहा।

पक्षीविद् अरविन्द कुमार मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष गणना में गोगाबील झील में देशी व विदेशी पक्षियों की संख्या बढ़ी है। 2019 में गोगाबील झील को बिहार का एकमात्र कम्युनिटी रिजर्व और कन्जेवेंशन रिजर्व के रूप में घोषित किया ग‌या था। पक्षी गणना में अरविन्द मिश्रा के अलावा बिट्टू कुमार, संतोष कुमार , श्वेता कश्यप, अभिषेक तिवारी, सिताबुद्दीन और स्थानीय वनरक्षी भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के दौरों से गोगाबील झील में मछुआरों के नावों के संचालन को बंद कर दिया गया जिससे मछलियों के साथ-साथ पक्षियों को भी सकून मिला और इनकी संख्या में वृद्धि हुई।इस वर्ष बिहार में 110 से अधिक जलाशयों में जलपक्षियों की गणना हो रही है। इसका उद्देश्य जलाशयों की वर्तमान स्थिति, खतरों का अध्ययन और संरक्षण को लेकर जन‌भागीदारी को बढ़ाना है।
गोगाबील झील में इस बार करीब 8500 से 9000 जलपक्षी प्रवास करने पहुंचे। 4500 से अधिक लेसर व्हिसलिंग डक (छोटी सिल्ली) की रिकार्ड उपस्थिति रही। 40 से अधिक फल्वस व्हिसलिंग डक (बड़ी सिल्ली) भी नजर आई जो राज्य में अन्यत्र कम दिखती है। 2000 से अधिक रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड (लालसर) झुंड में दिखाई दिए। इसके अलावा गडवाल (मैल), कॉमन पोचार्ड (बुरार), नोर्दर्न पिनटेल (सींखपर), व्हाइट आइड पोचार्ड (कर्चिया बत्तख),टफेड डक (कलसिरा बत्तख),,गागेनी (चैता), यूरेशियन कूट (सरार),ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीव (शिवा हंस),नौर्दर्न लैपविंग (काली टिटिहरी),ग्लासी आइबिस (कौआरी बुज्जा) आदि दिखाई दिए।

गेड़ाबाड़ी पार्क में जलपक्षि‌यों की संख्या कम रही लेकिन पेडों पर रहनेवाले पक्षियों में विविधता अधिक दिखी । भवारा कोठी में 250 से अधिक लेसर व्हिसलिंग डक ,50 व्हाइट आइड पोचार्ड और एक टफटेड डक देखे गये। कनचिरा जलस्थल में पानी की कमी के कारण पक्षी कम दिखे, लेकिन व्हाइट वैगटेल (सफेद खंजन) और रोजी पिपिट (गुलाबी चरचरी )नजर आए ।बल्दिया चौर में मछली पकड़ने के ठेकों और मखाना की खेती की वजह से पक्षियों की उपस्थिति प्रभावित हुई फिर भी विविधता बनी रही।

इस बार गोगाबील एवं अन्य जलाशयों में जलपक्षियों की संख्या में हुई वृद्धि से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि अगर जलाशयों में मानवीय दखल कम हो और उचित संरक्षण मिले, तो प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी संभव है।

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