जल है तो कल है
सृष्टि पंच तत्व अंतर,जल अद्भुत अनमोल ।
जीवन आयुष श्रेष्ठ पद,
पग पग दिव्य तोल ।
अमिय तुल्य नीर संग ,
जीवंत हर पल है ।
जल है तो कल है ।।
पेयजल दुरूपयोग व्यर्थता,
सर्वदा अक्षम्य पाप ।
अवांछित कृत्य परिणति ,
मानवता स्पंदन संताप ।
सलिल अतिदोहन काज,
प्रकृति काया निर्बल है ।
जल है तो कल है ।।
जल संरक्षण महाकाज ,
प्रयास संचेतना जरूरी ।
जीवन उत्तम आभा हित,
बचाव एकमात्र धुरी ।
उद्गम स्थल खुशहाली,
खुशियां आगम सकल है ।
जल है तो कल है ।।
सर्वजन सदा अग्र तत्पर,
जल संरक्षण परम शपथ ।
समृद्ध उन्नत संसाधन चाह,
प्रशस्त आह्लादित भोर पथ ।।
जल बचत मूल मंत्र व्यंजना ,
समग्र जीवन सुसफल है ।
जल है तो कल है ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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