अभिनंदन है सनातन वर्ष
सनातन धर्म की जय, भगवा ध्वज की जय हो।पावन नूतन साल है, श्रद्धा भक्ति की जय हो।
आस्था सिंधु घट घट में, हर हर महादेव का नारा।
जय श्री राम गूंजे व्योम, प्रीत की अविरल धारा।
सुशोभित भाल चंदन से, गले में वैजयंती माला।
जप तप योग भक्ति भजन, गाए भक्त मतवाला।
पूजन थाल सजे घर-घर, महके आंगन फुलवारी।
सुखदायक नया साल, झूमे नाचे नर और नारी।
हिंदुत्व भरे अजेय हुंकार, परचम विश्व में लहराए।
संपन्नता भरे सब भंडार, होठों पर खुशियां छाए।
मनमंदिर में उजियारा, ज्योत संस्कारों की जागे।
उमड़े विश्वास प्रेम की धारा, दुर्गुण दोष सब भागे।
स्वागत नव विचारों का, नूतन वर्ष लेकर आया।
अभिनंदन शुभ वंदन, सनातन शक्ति रूप छाया।
सिंदरी शामें हुई मस्त, भोर की नव किरणें छाई।
जय सनातन वर्ष की, भाव भगीरथी उतर आई।
रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
रचना स्वरचित व मौलिक है
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