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चलते रहना ही जीवन है

चलते रहना ही जीवन है

बढ़ते रहो मुसाफिर प्यारे चलते रहना ही जीवन है।
चलते रहते चांद सितारे खिलते पुष्पों से उपवन है।
कंटक शूल होंगे पथ में बाधाओं का मिलना तय है।
हृदय में साहस भर लेना मुश्किलों का कहां भय है।
साध निशाना बढ़ते जाना मंजिलों की ओर गमन है।
हौसला हिम्मत मत हारो चलते रहना ही जीवन है।


अंधियारा रस्ता रोकेगा घनघोर घटाएं नभ छाएंगी।
कभी दुखों का पहाड़ मिले कभी आंधियां आएंगी।
धीरज धरकर दुर्गम राहों में महकाते रहना चमन है।
गीत गुनगुनाते जाना राहीं चलते रहना ही जीवन है।
रंग बदलते लोग यहां भांति भांति की भाव भंगिमा।
प्रीत भरी रसधार बहाना संस्कारों की रखना गरिमा।
अपनापन अनमोल मोती मानवता का सारा धन है।
मुस्कानों के मोती बांटकर चलते रहना ही जीवन है।


रमाकांत सोनी सुदर्शन


नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान

रचना स्वरचित व मौलिक है


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