धैर्य एवं विनम्रता: सफलता की पहचान
सफलता का शिखर हर किसी का सपना होता है, लेकिन इस ऊँचाई पर संतुलन बनाए रखना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। जब हम सफलता की ऊँचाइयों को छूते हैं, तो हमें धीरज और विनम्रता का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
जैसे पक्षी आसमान में ऊँचा उड़ने के बावजूद जानते हैं कि वहाँ बैठने का कोई स्थान नहीं होता, वैसे ही सफलता प्राप्त करने के बाद हमें यह समझना चाहिए कि ऊँचाई पर ठहराव संभव नहीं है। यदि हम अहंकार में बहकर अपनी जड़ों से दूर हो जाएँ, तो गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
सफलता का असली अर्थ केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने गुणों को बनाए रखते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना है। विनम्रता और धैर्य हमारे साथ रहें तो हम ऊँचाई पर भी संतुलित रह सकते हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
पंकज शर्मा
(कमल सनातनी)
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