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मतलब का रिश्ता

मतलब का रिश्ता

बड़े ही दुख से,
एक दिन बाप ने बेटे से पुछा,
हम आपके हैं कौन ।
बेटे ने जैसे अनसुनी कर दी,
और काफी देर तक रहा मौन।।
फिर बाप ने दुहराया,
बेटा मेरे प्रश्न का जबाब दो ।
इस बार बेटा गुस्से में मुंह खोला,
मैंने आपसे कुछ रूपये मांगे थे,
मुझे आपने क्यों नहीं दिया,
आप पहले मुझे इसका हिसाब दो।।
बाप ने कहा बेटा मैं रिटायर्ड हूँ,
मुझे कोई पेंशन नहीं मिलता है।
तुम तो कुछ करते भी नहीं,
जवान होकर निठल्ले बैठे रहते हो,
और जानने की कोशिश भी नहीं करते,
कि यह घर बार कैसे चलता है।।
मुझे रिटायरमेंट पर जो मिला था,
उससे तेरे बहन की शादी कर दी।
कुछ बचा उस पैसे से,
कर्जदारों की कर्ज भर दी।।
अब आशा लगी है कि,
तुम कुछ कमाओगे।
अपने बाल बच्चों सहित,
माँ बाप को भी खिलाओगे।।
बेटे ने कहा, वाह
आपका पैसा था बेटी की शादी के लिए,
और अब मैं कमा कर खिलाउंगा।
मैं आपका अब कुछ भी नहीं हूँ ,
और अब साथ नहीं रह पाउंगा।।
ऐसा कह कर बेटे ने,
बाल बच्चों सहित मुंह मोड़ लिया।
पैसा नहीं मिला इसलिए,
बुढ़े माँ बाप से रिश्ता तोड़ लिया।।
आज कल ऐसा ही,
हर घर में होता जा रहा है।
पैसा और मतलब के चलते,
माँ बाप से रिश्ता टूटते जा रहा है।।

जय प्रकाश कुंवर


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