नई परिभाषा
भूल गये लोग अबप्यार की परिभाषा ..।
आ गया दौर कैसा
देख रहा है जमाना।।
एक वो दौर था
मिलते थे लोग जब।
सुख दुख की बातें
किया करते थे तब।।
अब ये कैसा जमाना
देखो कैसे आ गया।
जहाँ रिश्तों का मतलब
लोग समझते नहीं।।
घर बड़ा है बहुत
पर वो खाली पड़ा।
अपनों को रहने का
दिल ये रखते नही।।
दिल धड़कता बहुत
केवल स्वार्थ के लिए।
मतलब का जमाना और
लोग है भी मतलबी।।
देखो तो अब ये
रिश्तों के मयाने।
है जहाँ सब अपने
पर दिलमें है नही जगह।।
भूल गये लोग अब
प्यार की परिभाषा।
आ गया दौर कैसा
देख रहा है जमाना।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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