(भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की उत्सर्ग वात्सरिकी बेला)
फांसी के फंदे से,आजादी का सिंहनाद
******************************तेईस मार्च उन्नीस सौ इक्कतीस,
दिवस मनोरमा अद्भुत विशेष ।
प्रकृति पटल उमंग उल्लास,
दैहिक आनंद भाव अधिशेष ।
असीम नमन दिव्य बलिवेदी,
हिय हिलोरित राष्ट्र प्रेम निर्बाध ।
फांसी के फंदे से,आजादी का सिंहनाद ।।
आत्मविश्वासी अभय कदम,
चाल ढाल रण बांकुरी ।
मातृभूमि छटा मनमोहिनी,
रंग बासंती धुन बांसुरी ।
उत्सर्ग उत्कंठा धार अपार,
अभिव्यक्ति अंतर देश संवाद ।
फांसी के फंदे से,आजादी का सिंहनाद ।।
मां भारती रज रज रग रग,
सरित प्रवाह अनंत उजास ।
वीर वंदन अभिनंदन अवसर,
स्वतंत्रता हित सार्थक प्रयास ।
हिन्द आभा तद कालखंड,
चहुँ ओर स्वाधीनता उन्माद ।
फांसी के फंदे से,आजादी का सिंहनाद ।।
महामृत्युंजय स्वरिका संग,
ध्येय रक्षा राष्ट्र स्वाभिमान ।
सहर्ष वरण अवसान बिंदु,
चाह राह हिंद मुस्कान ।
स्मृति प्रभा जननी जन्म धरा,
फांसी सह प्रणय आह्लाद ।
फांसी के फंदे से,आजादी का सिंहनाद ।।
*कुमार महेंद्र*
(स्वरचित मौलिक रचना)
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